नाहिन रामु राज के भूखे
नाहिन रामु राज के भूखे
चौपाई २, दोहा ५० के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
नाहिन रामु राज के भूखे। धरम धुरीन बिषय रस रूखे॥ गुर गृह बसहुँ रामु तजि गेहू। नृप सन अस बरु दूसर लेहू॥ २ ॥
अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी राज्य के भूखे नहीं हैं। वे धर्म की धुरी को धारण करने वाले और विषय-रस से रूखे हैं (अर्थात उनमें विषयासक्ति है ही नहीं)। [इसलिए तुम यह शंका न करो कि श्रीराम वन न गए तो भरत के राज्य में विघ्न करेंगे; इतने पर भी मन न माने तो] तुम राजा से दूसरा ऐसा वर ले लो कि श्रीराम घर छोड़कर गुरु के घर रहें।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “राम-दशरथ संवाद, कैकेयी को समझाना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ५० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-दशरथ संवाद, अयोध्या का विषाद और कैकेयी को मनाने का असफल प्रयास का वर्णन है।
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राम-दशरथ संवाद, कैकेयी को समझाना