मुनिबर अतिथि प्रानप्रिय पाए
मुनिबर अतिथि प्रानप्रिय पाए
चौपाई २, दोहा १२५ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
मुनिबर अतिथि प्रानप्रिय पाए। कंद मूल फल मधुर मगाए॥ सिय सौमित्रि राम फल खाए। तब मुनि आश्रम दिए सुहाए॥ २ ॥
अर्थ
श्रेष्ठ मुनि वाल्मीकिजी ने प्राणप्रिय अतिथियों को पाकर उनके लिये मधुर कन्द, मूल और फल मँगवाये। श्रीसीताजी, लक्ष्मणजी और रामचन्द्रजी ने फलों को खाया। तब मुनि ने उनको [विश्राम करने के लिये] सुन्दर स्थान बतला दिये।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १२५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम और महर्षि वाल्मीकि का मिलन तथा प्रभु के सच्चे निवास का आध्यात्मिक उपदेश का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद