मिलेहि माझ बिधि बात बेगारी
मिलेहि माझ बिधि बात बेगारी
चौपाई १, दोहा ४७ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
मिलेहि माझ बिधि बात बेगारी। जहँ तहँ देहिं कैकइहि गारी॥ एहि पापिनिहि बूझि का परेऊ। छाइ भवन पर पावकु धरेऊ॥ १ ॥
अर्थ
सब मेल मिल गये थे (सब संयोग ठीक हो गये थे), इतने में ही विधाता ने बात बिगाड़ दी! जहाँ-तहाँ लोग कैकेयी को गाली दे रहे हैं! इस पापिनी को क्या सूझ पड़ा जो इसने छाए भवन पर आग रख दी।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “राम-दशरथ संवाद, कैकेयी को समझाना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ४७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-दशरथ संवाद, अयोध्या का विषाद और कैकेयी को मनाने का असफल प्रयास का वर्णन है।
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राम-दशरथ संवाद, कैकेयी को समझाना