मिलनि प्रीति किमि जाइ बखानी
मिलनि प्रीति किमि जाइ बखानी
चौपाई १, दोहा २४१ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
मिलनि प्रीति किमि जाइ बखानी। कबिकुल अगम करम मन बानी॥ परम पेम पूरन दोउ भाई। मन बुधि चित अहमिति बिसराई॥ १ ॥
अर्थ
मिलन की प्रीति कैसे बखानी जाय? वह तो कविकुल के लिये कर्म, मन, वाणी तीनों से अगम है। दोनों भाई मन, बुद्धि, चित्त और अहंकार को भुलाकर परम प्रेम से पूर्ण हो रहे हैं।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २४१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत का मंदाकिनी स्नान, चित्रकूट आगमन, राम-सीता-लक्ष्मण से करुण मिलन और दशरथ का श्राद्ध का वर्णन है।
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भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध