मगबासी नर नारि सुनि धाम काम
मगबासी नर नारि सुनि धाम काम
दोहा २२१ · अयोध्याकाण्ड
दोहा पाठ
मगबासी नर नारि सुनि धाम काम तजि धाइ। देखि सरूप सनेह सब मुदित जनम फलु पाइ॥ २२१ ॥
अर्थ
मार्ग में रहनेवाले स्त्री-पुरुष यह सुनकर घर और काम-काज छोड़कर दौड़ पड़ते हैं और उनके रूप और प्रेम को देखकर वे सब जन्म लेने का फल पाकर आनन्दित होते हैं।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरतजी चित्रकूट के मार्ग में” प्रकरण का दोहा २२१ है। इस प्रकरण में भरतजी का चित्रकूट की ओर विरह और दीनभाव से प्रस्थान का वर्णन है।
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भरतजी चित्रकूट के मार्ग में