कृपासिंधु लखि लोग दुखारे

चौपाई १, दोहा ३०३ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

कृपासिंधु लखि लोग दुखारे। निज सनेहँ सुरपति छल भारे॥ सभा राउ गुर महिसुर मंत्री। भरत भगति सब कै मति जंत्री॥ १ ॥

अर्थ

कृपासिन्धु श्रीरामचन्द्रजी ने लोगों को अपने स्नेह और देवराज इन्द्र के भारी छल से दुखी देखा। सभा, राजा, गुरु, ब्राह्मण और मन्त्री आदि सभी की बुद्धि भरतजी की भक्ति से जंत्री हो गयी।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-भरत संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३०३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा भरत को पितृ आज्ञा, राजधर्म और समर्पण का उपदेश का वर्णन है।

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श्रीराम-भरत संवाद