कोपभवन सुनि सकुचेउ राऊ
कोपभवन सुनि सकुचेउ राऊ
चौपाई १, दोहा २५ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
कोपभवन सुनि सकुचेउ राऊ। भय बस अगहुड़ परइ न पाऊ॥ सुरपति बसइ बाहँबल जाकें। नरपति सकल रहहिं रुख ताकें॥ १ ॥
अर्थ
कोपभवन का नाम सुनकर राजा सहम गये। डर के मारे उनका पाँव आगे को नहीं पड़ता। स्वयं देवराज इन्द्र जिनकी भुजाओं के बल पर [राक्षसों से निर्भय होकर] बसता है और सम्पूर्ण राजालोग जिनका रुख देखते रहते हैं।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में दशरथ-कैकेयी संवाद, दो वरों की माँग और सुमंत्र द्वारा श्रीराम को महल में बुलाने का वर्णन है।
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दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना