कौसिकादि मुनि सचिव समाजू
कौसिकादि मुनि सचिव समाजू
चौपाई २, दोहा २९३ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
कौसिकादि मुनि सचिव समाजू। ग्यान अंबुनिधि आपुनु आजू॥ सिसु सेवकु आयसु अनुगामी। जानि मोहि सिख देइअ स्वामी॥ २ ॥
अर्थ
विश्वामित्रजी आदि मुनियों और मन्त्रियों का समाज है। और आज के दिन ज्ञान के समुद्र आप भी उपस्थित हैं। हे स्वामी! मुझे अपना बच्चा, सेवक और आज्ञानुसार चलनेवाला समझकर शिक्षा दीजिये।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “जनक-वसिष्ठ संवाद, सरस्वती द्वारा इन्द्र को समझाना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २९३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जनक-वसिष्ठ संवाद, इन्द्र की चिंता और सरस्वती द्वारा उनके संशय-निवारण का वर्णन है।
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जनक-वसिष्ठ संवाद, सरस्वती द्वारा इन्द्र को समझाना