कहि अनेक बिधि कथा पुरानी

चौपाई २, दोहा २६३ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

कहि अनेक बिधि कथा पुरानी। भरत प्रबोधु कीन्ह मुनि ग्यानी॥ बोले उचित बचन रघुनंदू। दिनकर कुल कैरव बन चंदू॥ २ ॥

अर्थ

तब ज्ञानी मुनि ने अनेक प्रकार की पुरानी कथाएँ कहकर भरतजी का समाधान किया। फिर सूर्यकुलरूपी कुमुदवन को प्रफुल्लित करने वाले चन्द्रमा श्रीरघुनंदन उचित वचन बोले--।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-भरतादि का संवाद” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २६३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सभा में श्रीराम और भरत के बीच धर्म, राज्य और पितृ आज्ञा विषयक गंभीर संवाद का वर्णन है।

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श्रीराम-भरतादि का संवाद