कहइ भुआलु सुनिअ मुनिनायक

चौपाई १, दोहा ३ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

कहइ भुआलु सुनिअ मुनिनायक। भए राम सब बिधि सब लायक॥ सेवक सचिव सकल पुरबासी। जे हमारे अरि मित्र उदासी॥ १ ॥

अर्थ

राजा ने कहा-हे मुनिराज! [कृपा करके यह निवेदन] सुनिए। श्रीरामचन्द्र अब सब प्रकार से सबके योग्य हो गये हैं। सेवक, मन्त्री, सब नगरवासी और जो हमारे शत्रु, मित्र या उदासीन हैं--।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामराज्याभिषेक की तैयारी और देवताओं द्वारा सरस्वतीजी से वनगमन हेतु प्रार्थना का वर्णन है।

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राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना