कहहिं भरतु मुनि कहा सो कीन्हे
कहहिं भरतु मुनि कहा सो कीन्हे
चौपाई ४, दोहा २५६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
कहहिं भरतु मुनि कहा सो कीन्हे। फलु जग जीवन्ह अभिमत दीन्हे॥ कानन करउँ जनम भरि बासू। एहि तें अधिक न मोर सुपासू॥ ४ ॥
अर्थ
भरतजी कहने लगे--मुनि ने जो कहा, वह करने से जगत् भर के जीवों को उनकी अभिमत वस्तु देने का फल होगा। मैं जन्मभर वन में वास करूँगा। मेरे लिये इससे बढ़कर और कोई सुख नहीं है।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीवसिष्ठजी का भाषण” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २५६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में चित्रकूट की सभा में वसिष्ठजी द्वारा धर्म, मर्यादा और भरत-भक्ति पर दिए गए मार्गदर्शक वचनों का वर्णन है।
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श्रीवसिष्ठजी का भाषण