जो कह रामु लखनु बैदेही
जो कह रामु लखनु बैदेही
चौपाई ४, दोहा १४३ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
जो कह रामु लखनु बैदेही। हिंकरि हिंकरि हित हेरहिं तेही॥ बाजि बिरह गति कहि किमि जाती। बिनुमनिफनिक बिकल जेहि भाँती॥ ४ ॥
अर्थ
जो कोई राम, लक्ष्मण या जानकी का नाम ले लेता है, घोड़े हिकर-हिकरकर उसकी ओर प्यार से देखने लगते हैं। घोड़ों की विरहदशा कैसे कही जा सकती है? वे ऐसे व्याकुल हैं जैसे मणि के बिना साँप व्याकुल होता है।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “सुमंत्र का शोकमग्न अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १४३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुमंत्र का खाली रथ लेकर शोकमग्न अयोध्या में वापसी और राम-वियोग का सर्वत्र विषाद का वर्णन है।
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सुमंत्र का शोकमग्न अयोध्या लौटना