जिअन मरन फलु दसरथ पावा

चौपाई १, दोहा १५६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

जिअन मरन फलु दसरथ पावा। अंड अनेक अमल जसु छावा॥ जिअत राम बिधु बदनु निहारा। राम बिरह करि मरनु सँवारा॥ १ ॥

अर्थ

जीने और मरने का फल तो दशरथजी ने ही पाया, जिनका निर्मल यश अनेक ब्रह्माण्डों में छा गया। जीते-जी तो श्रीरामचन्द्रजी के चन्द्रमा के समान मुख को देखा और श्रीराम के विरह को निमित्त बनाकर अपना मरण सुधार लिया।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-सुमंत्र संवाद और दशरथ का देहावसान” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १५६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुमंत्र-दशरथ संवाद और राम-वियोग में दशरथ का देहावसान का वर्णन है।

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दशरथ-सुमंत्र संवाद और दशरथ का देहावसान