जेहि तरु तर प्रभु बैठहिं जाई

चौपाई ४, दोहा ११३ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

जेहि तरु तर प्रभु बैठहिं जाई। करहिं कलपतरु तासु बड़ाई॥ परसि राम पद पदुम परागा। मानति भूमि भूरि निज भागा॥ ४ ॥

अर्थ

जिस वृक्ष के नीचे प्रभु जा बैठते हैं, कल्पवृक्ष भी उसकी बड़ाई करते हैं। श्रीरामचन्द्रजी के चरणकमलों की रज का स्पर्श करके पृथ्वी अपना बहुत बड़ा सौभाग्य मानती है।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “यमुना को प्रणाम, वनवासियों का प्रेम” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ११३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में यमुना-प्रणाम और मार्ग में वनवासियों व ग्रामवासियों के प्रेममय दर्शन का वर्णन है।

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यमुना को प्रणाम, वनवासियों का प्रेम