जे जन कहहिं कुसल हम देखे

चौपाई ४, दोहा २२४ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

जे जन कहहिं कुसल हम देखे। ते प्रिय राम लखन सम लेखे॥ एहि बिधि बूझत सबहि सुबानी। सुनत राम बनबास कहानी॥ ४ ॥

अर्थ

जो लोग कहते हैं कि हमने उनको कुशलपूर्वक देखा है, उनको ये श्रीराम-लक्ष्मण के समान ही प्यारे मानते हैं। इस प्रकार सबसे सुन्दर वाणी से पूछते और श्रीरामजी के वनवास की कहानी सुनते जाते हैं।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरतजी चित्रकूट के मार्ग में” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २२४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरतजी का चित्रकूट की ओर विरह और दीनभाव से प्रस्थान का वर्णन है।

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भरतजी चित्रकूट के मार्ग में