जौं पै इन्हहि दीन्ह बनबासू
जौं पै इन्हहि दीन्ह बनबासू
चौपाई ३, दोहा ११९ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
जौं पै इन्हहि दीन्ह बनबासू। कीन्ह बादि बिधि भोग बिलासू॥ ए बिचरहिं मग बिनु पदत्राना। रचे बादि बिधि बाहन नाना॥ ३ ॥
अर्थ
जब विधाता ने इनको वनवास दिया है, तब उसने भोग-विलास व्यर्थ ही बनाये। जब ये बिना जूते के (नंगे ही पैरों) रास्ते में चल रहे हैं, तब विधाता ने अनेक वाहन (सवारियाँ) व्यर्थ ही रचे।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “यमुना को प्रणाम, वनवासियों का प्रेम” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ११९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में यमुना-प्रणाम और मार्ग में वनवासियों व ग्रामवासियों के प्रेममय दर्शन का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
यमुना को प्रणाम, वनवासियों का प्रेम