जौं पाँचहि मत लागै नीका
जौं पाँचहि मत लागै नीका
चौपाई २, दोहा ५ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
जौं पाँचहि मत लागै नीका। करहु हरषि हियँ रामहि टीका॥ २ ॥
अर्थ
[और कहा--] यदि पंचों को (आप सबको) यह मत अच्छा लगे, तो हृदय में हर्षित होकर आप लोग श्रीरामचन्द्र का राजतिलक कीजिये।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामराज्याभिषेक की तैयारी और देवताओं द्वारा सरस्वतीजी से वनगमन हेतु प्रार्थना का वर्णन है।
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राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना