जौं केवल पितु आयसु ताता
जौं केवल पितु आयसु ताता
चौपाई १, दोहा ५६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
जौं केवल पितु आयसु ताता। तौ जनि जाहु जानि बड़ि माता॥ जौं पितु मातु कहेउ बन जाना। तौ कानन सत अवध समाना॥ १ ॥
अर्थ
हे तात! यदि केवल पिताजी की ही आज्ञा हो, तो माता को [पिता से] बड़ी जानकर वन को मत जाओ। किन्तु यदि पिता-माता दोनों ने वन जाने को कहा हो, तो वन तुम्हारे लिये सैकड़ों अयोध्याओं के समान है।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “राम-कौसल्या संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ५६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा माता कौसल्या को वनवास का समाचार और धर्म का उपदेश का वर्णन है।
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राम-कौसल्या संवाद