जाति पाँति धनु धरमु बड़ाई

चौपाई ३, दोहा १३१ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

जाति पाँति धनु धरमु बड़ाई। प्रिय परिवार सदन सुखदाई॥ सब तजि तुम्हहि रहइ उर लाई। तेहि के हृदयँ रहहु रघुराई॥ ३ ॥

अर्थ

जाति, पाँति, धन, धर्म, बड़ाई, प्यारा परिवार और सुख देनेवाला घर--सबको छोड़कर जो केवल आपको ही हृदय में धारण किये रहता है, हे रघुनाथजी! आप उसके हृदय में रहिये।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १३१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम और महर्षि वाल्मीकि का मिलन तथा प्रभु के सच्चे निवास का आध्यात्मिक उपदेश का वर्णन है।

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श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद