जहँ सिय रामु लखनु निसि सोए

चौपाई ४, दोहा १९८ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

जहँ सिय रामु लखनु निसि सोए। कहत भरे जल लोचन कोए॥ भरत बचन सुनि भयउ बिषादू। तुरत तहाँ लइ गयउ निषादू॥ ४ ॥

अर्थ

जहाँ सीताजी, श्रीरामजी और लक्ष्मण रात को सोये थे। ऐसा कहते ही उनके नेत्रों के कोरों में [प्रेमाश्रुओं का] जल भर आया। भरतजी के वचन सुनकर निषाद को बड़ा विषाद हुआ। वह तुरंत ही उन्हें वहाँ ले गया--।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत-निषाद मिलन” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १९८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत और निषादराज के भावपूर्ण मिलन-संवाद तथा नगरवासियों की भक्ति का वर्णन है।

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भरत-निषाद मिलन