जहँ जहँ राम चरन चलि जाहीं
जहँ जहँ राम चरन चलि जाहीं
चौपाई २, दोहा ११३ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
जहँ जहँ राम चरन चलि जाहीं। तिन्ह समान अमरावति नाहीं॥ पुन्यपुंज मग निकट निवासी। तिन्हहि सराहहिं सुरपुरबासी॥ २ ॥
अर्थ
जहाँ-जहाँ श्रीरामचन्द्रजी के चरण चले जाते हैं, उनके समान अमरावती भी नहीं है। रास्ते के निकट बसने वाले भी बड़े पुण्यात्मा हैं—स्वर्ग में रहने वाले देवता भी उनकी सराहना करते हैं—।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “यमुना को प्रणाम, वनवासियों का प्रेम” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ११३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में यमुना-प्रणाम और मार्ग में वनवासियों व ग्रामवासियों के प्रेममय दर्शन का वर्णन है।
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यमुना को प्रणाम, वनवासियों का प्रेम