जहाँ बैठि मुनिगन सहित नित सिय
जहाँ बैठि मुनिगन सहित नित सिय
दोहा २३७ · अयोध्याकाण्ड
दोहा पाठ
जहाँ बैठि मुनिगन सहित नित सिय रामु सुजान। सुनहिं कथा इतिहास सब आगम निगम पुरान॥ २३७ ॥
अर्थ
जहाँ सुजान श्रीसीतारामजी मुनिगण सहित बैठकर नित्य आगम, निगम और पुराणों की सब कथा-इतिहास सुनते हैं।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध” प्रकरण का दोहा २३७ है। इस प्रकरण में भरत का मंदाकिनी स्नान, चित्रकूट आगमन, राम-सीता-लक्ष्मण से करुण मिलन और दशरथ का श्राद्ध का वर्णन है।
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भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध