जगु भय मगन गगन भइ बानी

चौपाई १, दोहा २३१ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

जगु भय मगन गगन भइ बानी। लखन बाहुबलु बिपुल बखानी॥ तात प्रताप प्रभाउ तुम्हारा। को कहि सकइ को जाननिहारा॥ १ ॥

अर्थ

सारा जगत् भय में डूब गया। तब लक्ष्मणजी के अपार बाहुबल की प्रशंसा करती हुई आकाशवाणी हुई— हे तात! तुम्हारे प्रताप और प्रभाव को कौन कह सकता है और कौन जानने वाला है ?

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “राम द्वारा लक्ष्मण को भरत की महिमा” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २३१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा लक्ष्मण को शांत करके भरतजी के निष्कलुष प्रेम और धर्मनिष्ठा की महिमा का वर्णन है।

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राम द्वारा लक्ष्मण को भरत की महिमा