जागे सकल लोग भएँ भोरू
जागे सकल लोग भएँ भोरू
चौपाई १, दोहा ८६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
जागे सकल लोग भएँ भोरू। गे रघुनाथ भयउ अति सोरू॥ रथ कर खोज कतहुँ नहिं पावहिं। राम राम कहि चहुँ दिसि धावहिं॥ १ ॥
अर्थ
सबेरा होते ही सब लोग जागे, तो बड़ा शोर मचा कि श्रीरघुनाथजी चले गये। कहीं रथ का खोज नहीं पाते, सब “हा राम! हा राम!” पुकारते हुए चारों ओर दौड़ रहे हैं।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “वनगमन, नगरवासियों को छोड़कर आगे बढ़ना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ८६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम, सीता और लक्ष्मण के वनगमन और नगरवासियों को सोता छोड़कर आगे बढ़ने का वर्णन है।
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वनगमन, नगरवासियों को छोड़कर आगे बढ़ना