जग मंगल भल काजु बिचारा
जग मंगल भल काजु बिचारा
चौपाई ४, दोहा ५ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
जग मंगल भल काजु बिचारा। बेगिअ नाथ न लाइअ बारा॥ नृपहि मोदु सुनि सचिव सुभाषा। बढ़त बौंड़ जनु लही सुसाखा॥ ४ ॥
अर्थ
आपने जगत् भर का मङ्गल करने वाला भला काम सोचा है। हे नाथ! शीघ्रता कीजिये, देर न लगाइये। मन्त्रियों की सुन्दर वाणी सुनकर राजा को ऐसा आनन्द हुआ मानो बढ़ती हुई बेल सुन्दर डाली का सहारा पा गयी हो।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामराज्याभिषेक की तैयारी और देवताओं द्वारा सरस्वतीजी से वनगमन हेतु प्रार्थना का वर्णन है।
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राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना