जब तें रामु ब्याहि घर आए
जब तें रामु ब्याहि घर आए
चौपाई १, दोहा १ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
जब तें रामु ब्याहि घर आए। नित नव मंगल मोद बधाए॥ भुवन चारिदस भूधर भारी। सुकृत मेघ बरषहिं सुख बारी॥ १ ॥
अर्थ
जब से श्रीरामचन्द्रजी विवाह करके घर आए, तब से [अयोध्या में] नित्य नये मंगल हो रहे हैं और आनन्द के बधावे बज रहे हैं। चौदहों लोक रूपी बड़े भारी पर्वतों पर पुण्य रूपी मेघ सुख रूपी जल बरसा रहे हैं।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामराज्याभिषेक की तैयारी और देवताओं द्वारा सरस्वतीजी से वनगमन हेतु प्रार्थना का वर्णन है।
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राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना