जब जब रामु अवध सुधि करहीं
जब जब रामु अवध सुधि करहीं
चौपाई २, दोहा १४१ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
जब जब रामु अवध सुधि करहीं। तब तब बारि बिलोचन भरहीं॥ सुमिरि मातु पितु परिजन भाई। भरत सनेहु सीलु सेवकाई॥ २ ॥
अर्थ
जब-जब श्रीरामचन्द्रजी अयोध्या की याद करते हैं, तब-तब उनके नेत्रों में जल भर आता है। माता-पिता, कुटुम्बियों और भाइयों तथा भरत के प्रेम, शील और सेवाभाव को याद करके—
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “चित्रकूट में निवास, कोल-भीलों द्वारा सेवा” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १४१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में चित्रकूट में श्रीराम के निवास और कोल-भीलों की प्रेमपूर्ण सेवा का वर्णन है।
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चित्रकूट में निवास, कोल-भीलों द्वारा सेवा