ग्राम निकट जब निकसहिं जाई
ग्राम निकट जब निकसहिं जाई
चौपाई ४, दोहा १०९ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
ग्राम निकट जब निकसहिं जाई। देखहिं दरसु नारि नर धाई॥ होहिं सनाथ जनम फलु पाई। फिरहिं दुखित मनु संग पठाई॥ ४ ॥
अर्थ
जब वे किसी गाँव के पास होकर निकलते हैं तब स्त्री-पुरुष दौड़कर उनके दर्शन करने लगते हैं। जन्म का फल पाकर वे सनाथ हो जाते हैं और अपने मन को उनके साथ भेजकर दुःखी होकर लौट आते हैं।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “प्रयाग में भरद्वाज से भेंट” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १०९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में प्रयाग में भरद्वाज मुनि से श्रीराम की भेंट और यमुनातट निवासियों के प्रेम का वर्णन है।
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प्रयाग में भरद्वाज से भेंट