गावँ गावँ अस होइ अनंदू
गावँ गावँ अस होइ अनंदू
चौपाई १, दोहा १२२ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
गावँ गावँ अस होइ अनंदू। देखि भानुकुल कैरव चंदू॥ जे कछु समाचार सुनि पावहिं। ते नृप रानिहि दोसु लगावहिं॥ १ ॥
अर्थ
सूर्यकुलरूपी कुमुदिनी के प्रफुल्लित करनेवाले चन्द्रमास्वरूप श्रीरामचन्द्रजी के दर्शन कर गाँव-गाँव में ऐसा ही आनन्द हो रहा है। जो लोग [वनवास दिये जाने का] कुछ भी समाचार सुन पाते हैं, वे राजा-रानी [दशरथ-कैकेयी] को दोष लगाते हैं।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “यमुना को प्रणाम, वनवासियों का प्रेम” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १२२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में यमुना-प्रणाम और मार्ग में वनवासियों व ग्रामवासियों के प्रेममय दर्शन का वर्णन है।
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यमुना को प्रणाम, वनवासियों का प्रेम