एहि बिधि मुनिबर भवन देखाए

चौपाई १, दोहा १३२ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

एहि बिधि मुनिबर भवन देखाए। बचन सप्रेम राम मन भाए॥ कह मुनि सुनहु भानुकुलनायक। आश्रम कहउँ समय सुखदायक॥ १ ॥

अर्थ

इस प्रकार मुनिश्रेष्ठ वाल्मीकिजी ने श्रीरामचन्द्रजी को घर दिखाये। उनके प्रेमपूर्ण वचन श्रीरामजी के मन को अच्छे लगे। फिर मुनि ने कहा-हे सूर्यकुल के स्वामी! सुनिये, अब मैं इस समय के लिये सुखदायक आश्रम कहता हूँ (निवासस्थान बतलाता हूँ)।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १३२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम और महर्षि वाल्मीकि का मिलन तथा प्रभु के सच्चे निवास का आध्यात्मिक उपदेश का वर्णन है।

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श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद