एहि बिधि करत प्रलाप कलापा

चौपाई ४, दोहा ८६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

एहि बिधि करत प्रलाप कलापा। आए अवध भरे परितापा॥ बिषम बियोगु न जाइ बखाना। अवधि आस सब राखहिं प्राना॥ ४ ॥

अर्थ

इस प्रकार बहुत-से प्रलाप करते हुए वे सन्ताप से भरे हुए अयोध्याजी में आये। उन लोगों के विषम वियोग की दशा का वर्णन नहीं किया जा सकता। [चौदह साल की] अवधि की आशा से ही वे प्राणों को रख रहे हैं।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “वनगमन, नगरवासियों को छोड़कर आगे बढ़ना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ८६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम, सीता और लक्ष्मण के वनगमन और नगरवासियों को सोता छोड़कर आगे बढ़ने का वर्णन है।

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वनगमन, नगरवासियों को छोड़कर आगे बढ़ना