एहि बिधि दाह क्रिया सब कीन्ही

चौपाई ३, दोहा १७० के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

एहि बिधि दाह क्रिया सब कीन्ही। बिधिवत न्हाइ तिलांजुलि दीन्ही॥ सोधि सुमृति सब बेद पुराना। कीन्ह भरत दसगात बिधाना॥ ३ ॥

अर्थ

इस प्रकार सब दाहक्रिया की गयी और सबने विधिपूर्वक स्नान करके तिलाञ्जलि दी। फिर वेद, स्मृति और पुराणों का मत निश्चय करके उसके अनुसार भरतजीने पिताका दशगात्र-विधान(दस दिनोंके कृत्य) किया।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत-कौसल्या संवाद और दशरथ की अंत्येष्टि” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १७० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत-कौसल्या मिलन, करुण संवाद और गुरु वसिष्ठ के मार्गदर्शन में दशरथ की अंत्येष्टि का वर्णन है।

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भरत-कौसल्या संवाद और दशरथ की अंत्येष्टि