दीख मंथरा नगरु बनावा

चौपाई १, दोहा १३ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

दीख मंथरा नगरु बनावा। मंजुल मंगल बाज बधावा॥ पूछेसि लोगन्ह काह उछाहू। राम तिलकु सुनि भा उर दाहू॥ १ ॥

अर्थ

मन्थरा ने देखा कि नगर सजाया हुआ है। सुन्दर, मंगलमय बधावे बज रहे हैं। उसने लोगों से पूछा कि कैसा उत्सव है? [उनसे] श्रीरामचन्द्रजी के राजतिलक की बात सुनते ही उसका हृदय जल उठा।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “सरस्वती का मंथरा की बुद्धि फेरना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सरस्वती द्वारा मंथरा की बुद्धि फेरना और कैकेयी को वरदान माँगने के लिए उकसाने का वर्णन है।

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सरस्वती का मंथरा की बुद्धि फेरना