धरि धीरजु उठि बैठ भुआलू
धरि धीरजु उठि बैठ भुआलू
चौपाई १, दोहा १५५ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
धरि धीरजु उठि बैठ भुआलू। कहु सुमंत्र कहँ राम कृपालू॥ कहाँ लखनु कहँ रामु सनेही। कहँ प्रिय पुत्रबधू बैदेही॥ १ ॥
अर्थ
धीरज धरकर राजा उठ बैठे और बोले--सुमन्त्र! कहो, कृपालु श्रीराम कहाँ हैं ? लक्ष्मण कहाँ हैं? स्नेही राम कहाँ हैं? और मेरी प्यारी बहू जानकी कहाँ है ?
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-सुमंत्र संवाद और दशरथ का देहावसान” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १५५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुमंत्र-दशरथ संवाद और राम-वियोग में दशरथ का देहावसान का वर्णन है।
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दशरथ-सुमंत्र संवाद और दशरथ का देहावसान