धन्य जनमु जगतीतल तासू
धन्य जनमु जगतीतल तासू
चौपाई १, दोहा ४६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
धन्य जनमु जगतीतल तासू। पितहि प्रमोदु चरित सुनि जासू॥ चारि पदारथ करतल ताकें। प्रिय पितु मातु प्रान सम जाकें॥ १ ॥
अर्थ
इस पृथ्वीतल पर उसका जन्म धन्य है जिसके चरित्र सुनकर पिता को परम आनन्द हो। जिसको माता-पिता प्राणों के समान प्रिय हैं, चारों पदार्थ (अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष) उसके करतलगत (मुट्ठी में) रहते हैं।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “राम-दशरथ संवाद, कैकेयी को समझाना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ४६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-दशरथ संवाद, अयोध्या का विषाद और कैकेयी को मनाने का असफल प्रयास का वर्णन है।
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राम-दशरथ संवाद, कैकेयी को समझाना