देखि पाय मुनिराय तुम्हारे
देखि पाय मुनिराय तुम्हारे
चौपाई १, दोहा १२६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
देखि पाय मुनिराय तुम्हारे। भए सुकृत सब सुफल हमारे॥ अब जहँ राउर आयसु होई। मुनि उदबेगु न पावै कोई॥ १ ॥
अर्थ
हे मुनिराज! आपके चरणों का दर्शन करने से आज हमारे सब पुण्य सफल हो गये (हमें सारे पुण्यों का फल मिल गया)। अब जहाँ आपकी आज्ञा हो और जहाँ कोई भी मुनि उद्वेग को प्राप्त न हो--।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १२६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम और महर्षि वाल्मीकि का मिलन तथा प्रभु के सच्चे निवास का आध्यात्मिक उपदेश का वर्णन है।
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श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद