देखत बन सर सैल सुहाए
देखत बन सर सैल सुहाए
चौपाई ३, दोहा १२४ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
देखत बन सर सैल सुहाए। बालमीकि आश्रम प्रभु आए॥ राम दीख मुनि बासु सुहावन। सुंदर गिरि काननु जलु पावन॥ ३ ॥
अर्थ
सुन्दर वन, तालाब और पर्वत देखते हुए प्रभु श्रीरामचन्द्रजी वाल्मीकिजी के आश्रम में आये। श्रीरामचन्द्रजी ने देखा कि मुनि का निवास स्थान बहुत सुन्दर है, जहाँ सुन्दर पर्वत, वन और पवित्र जल है।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १२४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम और महर्षि वाल्मीकि का मिलन तथा प्रभु के सच्चे निवास का आध्यात्मिक उपदेश का वर्णन है।
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श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद