बिदा किए सिर नाइ सिधाए

चौपाई २, दोहा १३७ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

बिदा किए सिर नाइ सिधाए। प्रभु गुन कहत सुनत घर आए॥ एहि बिधि सिय समेत दोउ भाई। बसहिं बिपिन सुर मुनि सुखदाई॥ २ ॥

अर्थ

फिर उनको विदा किया। वे सिर नवाकर चले और प्रभु के गुण कहते-सुनते घर आये। इस प्रकार देवता और मुनियों को सुख देनेवाले दोनों भाई सीताजी समेत वन में निवास करने लगे।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “चित्रकूट में निवास, कोल-भीलों द्वारा सेवा” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १३७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में चित्रकूट में श्रीराम के निवास और कोल-भीलों की प्रेमपूर्ण सेवा का वर्णन है।

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चित्रकूट में निवास, कोल-भीलों द्वारा सेवा