भरत तीसरे पहर कहँ कीन्ह प्रबेसु
भरत तीसरे पहर कहँ कीन्ह प्रबेसु
दोहा २०३ · अयोध्याकाण्ड
दोहा पाठ
भरत तीसरे पहर कहँ कीन्ह प्रबेसु प्रयाग। कहत राम सिय राम सिय उमगि उमगि अनुराग॥ २०३ ॥
अर्थ
प्रेम में उमँग-उमँगकर सीताराम-सीताराम कहते हुए भरतजी ने तीसरे पहर प्रयाग में प्रवेश किया।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरतजी का प्रयाग, भरद्वाज से संवाद” प्रकरण का दोहा २०३ है। इस प्रकरण में भरतजी का प्रयाग तीर्थ दर्शन और महर्षि भरद्वाज से भक्तिपूर्ण संवाद का वर्णन है।
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भरतजी का प्रयाग, भरद्वाज से संवाद