बरष चारिदस बिपिन बसि करि पितु

दोहा ५३ · अयोध्याकाण्ड

दोहा पाठ

बरष चारिदस बिपिन बसि करि पितु बचन प्रमान। आइ पाय पुनि देखिहउँ मनु जनि करसि मलान॥ ५३ ॥

अर्थ

चौदह वर्ष वन में रहकर, पिताजी के वचन को प्रमाणित कर, फिर लौटकर तेरे चरणों का दर्शन करूँगा; तू मन को म्लान न कर।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “राम-कौसल्या संवाद” प्रकरण का दोहा ५३ है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा माता कौसल्या को वनवास का समाचार और धर्म का उपदेश का वर्णन है।

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राम-कौसल्या संवाद