अति आरति सब पूँछहिं रानी

चौपाई १, दोहा १४८ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

अति आरति सब पूँछहिं रानी। उतरु न आव बिकल भइ बानी॥ सुनइ न श्रवन नयन नहिं सूझा। कहहु कहाँ नृपु तेहि तेहि बूझा॥ १ ॥

अर्थ

अत्यन्त आर्त होकर सब रानियाँ पूछती हैं; पर सुमन्त्र को कुछ उत्तर नहीं आता, उनकी वाणी विकल हो गयी (रुक गयी) है। न कानों से सुनायी पड़ता है और न आँखों से कुछ सूझता। वे जो भी सामने आता है उस-उससे पूछती हैं—कहो, राजा कहाँ हैं?

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “सुमंत्र का शोकमग्न अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १४८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुमंत्र का खाली रथ लेकर शोकमग्न अयोध्या में वापसी और राम-वियोग का सर्वत्र विषाद का वर्णन है।

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सुमंत्र का शोकमग्न अयोध्या लौटना