अब सबु आँखिन्ह देखेउँ आई
अब सबु आँखिन्ह देखेउँ आई
चौपाई ४, दोहा २६२ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
अब सबु आँखिन्ह देखेउँ आई। जिअत जीव जड़ सबइ सहाई॥ जिन्हहि निरखि मग साँपिनि बीछी। तजहिं बिषम बिषु तामस तीछी॥ ४ ॥
अर्थ
अब यहाँ आकर सब आँखों से देख लिया। जीता हुआ जीव जड़ होकर भी सब की सहायता करता है। जिनको देखकर रास्ते की साँपिनी और बिच्छी भी अपने भयंकर विष और तीक्ष्ण तामस को त्याग देती हैं।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-भरतादि का संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २६२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सभा में श्रीराम और भरत के बीच धर्म, राज्य और पितृ आज्ञा विषयक गंभीर संवाद का वर्णन है।
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श्रीराम-भरतादि का संवाद