तब चले बान कराल
तब चले बान कराल
छन्द १, दोहा २० के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
छन्द पाठ
तब चले बान कराल। फुंकरत जनु बहु ब्याल॥ कोपेउ समर श्रीराम। चले बिसिख निसित निकाम॥ १ ॥
अर्थ
तब भयानक बाण ऐसे चले, मानो फुफकारते हुए बहुत-से सर्प जा रहे हैं। श्रीरामचन्द्रजी संग्राम में क्रुद्ध हुए और अत्यन्त तीक्ष्ण बाण चले।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “शूर्पणखा कथा, खर-दूषण वध” प्रकरण का छन्द १, दोहा २० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शूर्पणखा की दुष्टता, उसके उकसावे पर खर-दूषण का श्रीराम से युद्ध और उनका संहार का वर्णन है।
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शूर्पणखा कथा, खर-दूषण वध