मुनिहि मिलत अस सोह कृपाला

चौपाई १२, दोहा १० के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

मुनिहि मिलत अस सोह कृपाला। कनक तरुहि जनु भेंट तमाला॥ राम बदनु बिलोक मुनि ठाढ़ा। मानहुँ चित्र माझ लिखि काढ़ा॥ १२ ॥

अर्थ

कृपालु श्रीरामचन्द्रजी मुनिसे मिलते हुए ऐसे शोभित हो रहे हैं, मानो सोने के वृक्ष से तमाल का वृक्ष गले लगकर मिल रहा हो। मुनि [निस्तब्ध] खड़े हुए [टकटकी लगाकर] श्रीरामजी का मुख देख रहे हैं, मानो चित्र में लिखकर बनाये गये हों।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “अगस्त्य मिलन और जटायु मिलन” प्रकरण का चौपाई १२, दोहा १० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुतीक्ष्ण की भक्ति, अगस्त्य मुनि से संवाद, दंडक वन प्रवेश और जटायु मिलन का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
अगस्त्य मिलन और जटायु मिलन