जब ते राम कीन्ह तहँ बासा

चौपाई १, दोहा १४ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

जब ते राम कीन्ह तहँ बासा। सुखी भए मुनि बीती त्रासा॥ गिरि बन नदीं ताल छबि छाए। दिन दिन प्रति अति होहिं सुहाए॥ १ ॥

अर्थ

जबसे श्रीरामजी ने वहाँ निवास किया तबसे मुनि सुखी हो गये, उनका डर जाता रहा। पर्वत, वन, नदी और तालाब शोभा से छा गये। वे दिनोंदिन अधिक सुहावने (मालूम) होने लगे।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “पंचवटी निवास और राम-लक्ष्मण संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में पंचवटी निवास में श्रीराम द्वारा लक्ष्मण को ज्ञान, वैराग्य, माया और भक्ति के उपदेश का वर्णन है।

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पंचवटी निवास और राम-लक्ष्मण संवाद