गो गोचर जहँ लगि मन जाई
गो गोचर जहँ लगि मन जाई
चौपाई २, दोहा १५ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
गो गोचर जहँ लगि मन जाई। सो सब माया जानेहु भाई॥ तेहि कर भेद सुनहु तुम्ह सोऊ। बिद्या अपर अबिद्या दोऊ॥ २ ॥
अर्थ
इन्द्रियों के विषयों को और जहाँ तक मन जाता है, हे भाई! उस सब को माया जानना। उसके भी--एक विद्या और दूसरी अविद्या, इन दोनों भेदों को तुम सुनो--।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “पंचवटी निवास और राम-लक्ष्मण संवाद” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में पंचवटी निवास में श्रीराम द्वारा लक्ष्मण को ज्ञान, वैराग्य, माया और भक्ति के उपदेश का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
पंचवटी निवास और राम-लक्ष्मण संवाद