धीरज धर्म मित्र अरु नारी

चौपाई ४, दोहा ५ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

धीरज धर्म मित्र अरु नारी। आपद काल परिखिअहिं चारी॥ बृद्ध रोगबस जड़ धनहीना। अंध बधिर क्रोधी अति दीना॥ ४ ॥

अर्थ

धैर्य, धर्म, मित्र और स्त्री—इन चारों की विपत्ति के समय ही परीक्षा होती है। वृद्ध, रोगवश, जड़, धनहीन, अन्धा, बहरा, क्रोधी और अत्यन्त ही दीन—।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “अनसूया का सीता को उपदेश” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीता और अनसूया के मिलन तथा अनसूया द्वारा पातिव्रत धर्म के उपदेश का वर्णन है।

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अनसूया का सीता को उपदेश