चला अकेल जान चढ़ि तहवाँ
चला अकेल जान चढ़ि तहवाँ
चौपाई ४, दोहा २३ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
चला अकेल जान चढ़ि तहवाँ। बस मारीच सिंधु तट जहवाँ॥ इहाँ राम जसि जुगुति बनाई। सुनहु उमा सो कथा सुहाई॥ ४ ॥
अर्थ
[यों विचारकर] रावण रथ पर चढ़कर अकेला ही वहाँ चला, जहाँ समुद्र के तट पर मारीच रहता था। [शिवजी कहते हैं कि--] हे पार्वती! यहाँ श्रीरामचन्द्रजी ने जैसी युक्ति रची, वह सुन्दर कथा सुनो।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “शूर्पणखा का रावण के पास जाना, माया सीता” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शूर्पणखा द्वारा रावण में दुराशा जगाना, सीता का अग्नि प्रवेश और माया सीता का प्राकट्य का वर्णन है।
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शूर्पणखा का रावण के पास जाना, माया सीता