भगति कि साधन कहउँ बखानी

चौपाई ३, दोहा १६ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

भगति कि साधन कहउँ बखानी। सुगम पंथ मोहि पावहिं प्रानी॥ प्रथमहिं बिप्र चरन अति प्रीती। निज निज कर्म निरत श्रुति रीती॥ ३ ॥

अर्थ

अब मैं भक्ति के साधन विस्तार से कहता हूँ--यह सुगम मार्ग है, जिससे जीव मुझको सहज ही पा जाते हैं। पहले तो ब्राह्मणों के चरणों में अत्यन्त प्रीति हो और वेद की रीति के अनुसार अपने-अपने [वर्णाश्रम के] कर्मों में लगा रहे।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “पंचवटी निवास और राम-लक्ष्मण संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में पंचवटी निवास में श्रीराम द्वारा लक्ष्मण को ज्ञान, वैराग्य, माया और भक्ति के उपदेश का वर्णन है।

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पंचवटी निवास और राम-लक्ष्मण संवाद