भगति जोग सुनि अति सुख पावा

चौपाई १, दोहा १७ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

भगति जोग सुनि अति सुख पावा। लछिमन प्रभु चरनन्हि सिरु नावा॥ एहि बिधि गए कछुक दिन बीती। कहत बिराग ग्यान गुन नीती॥ १ ॥

अर्थ

इस भक्तियोग को सुनकर लक्ष्मणजी ने अत्यन्त सुख पाया और उन्होंने प्रभु श्रीरामचन्द्रजी के चरणों में सिर नवाया। इस प्रकार वैराग्य, ज्ञान, गुण और नीति कहते हुए कुछ दिन बीत गये।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “पंचवटी निवास और राम-लक्ष्मण संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में पंचवटी निवास में श्रीराम द्वारा लक्ष्मण को ज्ञान, वैराग्य, माया और भक्ति के उपदेश का वर्णन है।

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पंचवटी निवास और राम-लक्ष्मण संवाद